क्योंकि

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क्योंकि

                      जानते हो तुम.... मै जब खामोश रहती हूँ, 
                      दिल ही दिल में तुमसे बहुत खुछ कहती हूँ!
                        कभी तुमने सूनी है मेरी खामोश आवाज?
                        कभी लगाया है तुमने जरा भी अंदाज?
                         की क्यों मेरे लफ्ज मौन हो जाते हैं?
                        क्यों वो आवाज का साथ नही पाते हैं?
                         क्योकि....जब आवाज थक जाती है,
                            तो लफ्ज भी थम जाते हैं,
                             वो थम जाते हैं क्योकि ....
                           जज्बातों से खाली हो जाते हैं,
                         क्योकि जज्बात भी तभी देते हैं साथ,
                             जब मिलते हैं खयालात
                                ....."".....

an educator presently serving as Academic Director , keeps deep passion for writing blogs , poetry and uploads videos of selfwritten short stories on YouTube .

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