द्रौपदी / गाली

0
36

आसान नही है ताने सहना , द्रौपदी बनकर रहना !

इतने सरपरस्तों के होते भी जलील होना ,

पुरुष(षों) को खुश रखना ,

अपने जीवन को पांच के बीच बांटना ,

भरी सभा में पति(यों)के कारण

अपने सगों के हाथों निर्वस्त्र होना,

आड़े वक़्त में मित्र पर आश्रित होना ,

कठिन है लांछनों से बेअसर होना ,

अपने इकलौते को मरते देखना !

कभी उस तरफ खड़े होकर देखो … जिंदगी !

आसान है हमेशा उठाना … लांछन भरी उंगली !

 

 

an educator presently serving as Academic Director , keeps deep passion for writing blogs , poetry and uploads videos of selfwritten short stories on YouTube .

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here