महिला दिवस

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क्यों मनाएं एक ही दिन महिला दिवस
जबकि
आज भी असख्य नारी हो रही शोषण को शिकार
नारी ही कर रही नारी पर वार
अस्मिता पर रोज उठ रहे सवाल
अखबारों में मचाए जा रहे बवाल !

शोषित ,निर्धन नारी की शान
क्यों चढ रही सूली पर आन
कब पाएंगी ये पूर्ण सम्मान ।

बन स्वच्छंद अपने ही पैरों मारी कुल्हाड़ी
छल प्रपंच देख दुनिया हारी
ईर्ष्या ,द्वेष की अग्नि पर भारी
कुंदन बन कब चमकेगी नारी ?

– डॉ. संगीता

मेरा व्यक्तित्त्व किसी परिचय का मोहताज नहीं
यह तो मात्र एक बीज है, वटवृक्ष नहीं
लेखन जूनून है मेरा, यह कोई व्यवसाय नहीं |

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