शुभचिन्तक..

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पड़ोस से आती लड़ाई की आवाज़ से हुआ ये अहसास ..
कि हमारे घर में लंबे समय से ये फालतू झगड़े नही होते ।
हम बड़ी शांति से जीवन बसर हैं करते ,
हम चार लोगों के परिवार में सभी हैं व्यस्त,
इसीलिए आपस में उलझने का नही है वक़्त ,
बच्चे कॉलेज में पढ़ते हैं,
पति भी अपने ऑफिस में दिनभर खटते हैं ,
मुझे भी घर के हैं पचास काम ,
इसीलिए हमारे घर में नही मचता कोहराम ,
शाम को जब एक एक करके सब आते हैं ,
तो अपने कमरों में मोबाइल या कंप्यूटर पर लग जाते हैं ,
पड़ोसी इतने सम्पन्न नही हैं हमारे ,
ना बड़ा घर है , ना अलग कमरे ,ना अलग मोबाइल , ना computer ना ही internet connection ,
इसीलिए या तो सब मिल बैठकर इसकी उसकी बुराई या फालतू गप्पों में टाइम लगाते हैं ,
और कुछ नही तो एक दुसरे कि life में घुस पैठ कर एक दूसरे पर ही चीखते चिल्लाते हैं ,
हर समय या तो हंसने या लड़ने की आवाज़ें आती हैं ,
हमारे घर में तो सबके पास अपना space है हम बेकार का झंझट नही उठाते हैं ,
हमारा तो social circle ही इतना बड़ा है कि घर के लोग ही आपस में ठीक से नही मिल पाते हैं ,
पड़ोसियों के जैसे हमारे घर मेहमानों का जमावड़ा भी नही रहता है ,
हाँ इंसान हैं तो हम कभी कभी थोड़ा bore हो जाते हैं ,
सो अपने अपने ग्रुप में दोस्तों के साथ होटल में बैठकर chill कर आते हैं ,
जीवन smooth चल रहा है क्योंकि कोई भी किसी से ज्यादा मतलब ही नही रख रहा है ।।

आप भी अगर चाहते हैं शांति से भरा एकांत जीवन ..तो छोड़िए बाकी दुनिया mobile और computer को बनाये असली शुभचिन्तक अपना ।

an educator presently serving as Academic Director , keeps deep passion for writing blogs , poetry and uploads videos of selfwritten short stories on YouTube .

2 COMMENTS

  1. You’ve stated the positive aspect of technology rather than blaming it.. And you turned all of us positively with your poem. Thanks!

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